Noida: नोएडा समेत प्रदेश को मिलेगी भीषण गर्मी में भरपूर बिजली, नए थर्मल पावर प्लांट किए गए शुरू
यूपीपीसीएल के एमडी पंकज कुमार ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अप्रैल से सितंर के बीच बिजली की मांग बढ़ेगी।

भीषण गर्मी में प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति होगी। योगी सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। ऊर्जा विभाग ने पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए इस साल लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई है। इसके लिए सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। वहीं, पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू से पूरी की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त मांग को बिजली एक्सचेंज के जरिये पूरा किया जाएगा।
यूपीपीसीएल के एमडी पंकज कुमार ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अप्रैल से सितंर के बीच बिजली की मांग बढ़ेगी। पिछले सालों की तुलना में मांग को देखते हुए इस साल जून में पीक डिमांड लगभग 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक होगी। मई और जुलाई में भी मांग 31 से 32 हजार मेगावाट के बीच रहने की संभावना है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने तैयारी करते हुए उत्पादन और आपूर्ति के सभी स्रोतों को सक्रिय कर दिया है।
वहीं पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। घाटमपुर, खुर्जा, पनकी, ओबरा और जवाहरपुर जैसे प्रमुख परियोजनाओं से उत्पादन शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं के चालू होने से प्रदेश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं घाटमपुर की तीसरी यूनिट 30 अप्रैल तक चालू हो जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी।
एमडी ने बताया कि पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू (लॉन्ग टर्म टाई-अप) के जरिए पूरी की जाएगी। शेष मांग को पूरा करने के लिए बिजली एक्सचेंज प्लेटफॉर्म जैसे आईईएक्स, पीएक्सआईएल और एचपीएक्स की मदद ली जाएगी। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जरूरत के समय अतिरिक्त बिजली खरीदी जाएगी। इससे न केवल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को कटौती से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ राज्यों के साथ लगभग 4,663 मिलियन यूनिट (एमयू)बिजली की बैंकिंग व्यवस्था की गई है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से बिजली ली जा सकेगी और बाद में वापस की जाएगी। यह व्यवस्था भी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




