Noida: किसान की बेटी बनी टॉपर, 10वीं और 12वीं के रिजल्ट में आया सुधार
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कुल 42674 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। हाईस्कूल में 22774 में से 21587 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 20181 छात्र पास हुए है।

यूपी बोर्ड ने वीरवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी कर दिया है। हाईस्कूल में जेवर के सेठ तुलाराम सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के छात्र देवेश कुमार 94.33 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर बने है। वहीं, इंटरमीडिएट में केसीएस गर्ल्स इंटर कॉलेज की हिमांशी शर्मा ने 91.20 प्रतिशत अंक लाकर परचम लहराया है। हाईस्कूल में 93.49 और इंटरमीडिएट का परिक्षा परिणाम 86.51 प्रतिशत रहा है। गौतमबुद्ध नगर का प्रदेश में हाईस्कूल में आठवां और इंटरमीडिएट में 12वां पायदान रहा है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कुल 42674 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। हाईस्कूल में 22774 में से 21587 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 20181 छात्र पास हुए है। इंटरमीडिएट में 20176 छात्रों में से 19502 छात्र ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 16872 छात्र पास हुए है। हाईस्कूल में जेवर के सेठ तुलराम सरस्वती विद्या मंदिर के देवेश कुमार ने 94.33 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला, रोजा जलालपुर स्थित एसबीएस इंटर कॉलेज की रिसिका कुमारी ने 93.17 प्रतिशत अंक हासिल कर दूसरा, धर्मपुरा खेड़ा गांव स्थित एसआरएस इंटर कॉलेज के हरि ओम और नोएडा के गढ़ी शहदरा के नागर पब्लिक स्कूल के पवन सिंह ने 93 प्रतिशत अंक लाकर हासिल किया है।
सूरजपुर के केसीएस गर्ल्स इंटर कॉलेज की हिमांशी शर्मा ने 91.20 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला, दादरी के मिहिर भोज गर्ल्स इंटर कॉलेज की गौरांगी ने 89.60 अंक हासिल कर दूसरा, दादरी के दयावती मैमोरियल इंटर कॉलेज की गुडिया कुमारी ने 89 प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा, केसीएस गल्र्स इंटर कॉलेज की खुशी ने 88.80 प्रतिशत अंक लाकर चौथा स्थान हासिल किया है।
इंटरमीडिएट में जिला टॉप करने वाली सूरजपुर के केसीएस बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा हिमांशी शर्मा किसान परिवार से ताल्लुक रखती है। हिमांशी का सपना प्रोफेसर बनना है। छात्रा खुशी ने 12वीं कक्षा में जनपद में चौथा स्थान हासिल करने वाली सपना डॉक्टर बनना है। हाईस्कूल में जिले में दूसरा स्थान हासिल करने वाली चिपियाना गांव की रिसिका कुमारी के पिता सचिन कुमार क्रेन आॅपरेटर है। जिले में पांचवां स्थान हासिल करने वाली गरिमा के पिता नहीं है। उनकी मां खेती करके उनकी पढ़ाई-लिखाई करा रही है।




