जसपाल राणा के निधन के बाद हार्ट अटैक रिकवरी पर बढ़ी चर्चा, डॉ. पंकज रंजन ने बताया स्टेंट लगने के बाद पहले 30 दिन क्यों होते हैं सबसे अहम

नोएडा – हाल ही में जसपाल राणा के निधन के बाद हार्ट अटैक और उससे जुड़ी जटिलताओं को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्टेंट लगने के बाद मरीज पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है या फिर कुछ समय तक विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के बाद रिकवरी का शुरुआती एक महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
हार्ट अटैक के दौरान हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। एंजियोप्लास्टी और स्टेंट की मदद से अवरुद्ध धमनी को खोलकर रक्त प्रवाह तो बहाल कर दिया जाता है, लेकिन हृदय को पूरी तरह स्वस्थ होने में समय लगता है। यही कारण है कि उपचार के बाद भी मरीज को चिकित्सकीय निगरानी और जीवनशैली में सुधार की आवश्यकता होती है।
डॉ. पंकज रंजन, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ सलाहकार, हृदय रोग विभाग (कार्डियोलॉजी), यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-110, नोएडा ने बताया कि स्टेंट लगना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे रिकवरी का अंत नहीं माना जाना चाहिए। हार्ट अटैक के बाद पहले 30 दिनों में अनियमित हृदय गति, दोबारा ब्लॉकेज, हार्ट फेलियर और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बना रह सकता है। इसलिए मरीजों को डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं और सलाह का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई मरीज बेहतर महसूस होने पर दवाएं लेना कम कर देते हैं या बंद कर देते हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से ब्लड थिनर दवाएं समय पर लेना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इन्हें छोड़ने से स्टेंट में रक्त का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. पंकज रंजन के अनुसार मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, मोटापा और अत्यधिक तनाव जैसे कारक भी रिकवरी को प्रभावित करते हैं। इसलिए मरीजों को संतुलित आहार, नियमित फॉलो-अप, पर्याप्त नींद और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधि अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि उपचार के बाद सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेंट इलाज का अंत नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की नई शुरुआत है। सही जीवनशैली, नियमित दवाओं और चिकित्सकीय निगरानी के साथ अधिकांश मरीज सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। इसलिए हार्ट अटैक के बाद पहले 30 दिनों को सावधानी, अनुशासन और नियमित देखभाल का समय मानना सबसे सुरक्षित और प्रभावी रणनीति है।



