Noida: पूर्व केंद्रीय मंत्री बोले-स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया विकलांगों को सम्मान, बांटी गई ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर
कार्यक्रम का आकर्षण छात्रों द्वारा तैयार की गई स्किल डेवलपमेंट प्रदर्शनी रही, जिसमें हस्तशिल्प, रेजिन आर्ट और अन्य नवाचारों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता की झलक देखने को मिली।

केंद्रीय उपभोक्ता, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने शनिवार को फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के दूसरे स्थापना दिवस समारोह में दिव्यांगों को इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल एवं व्हीलचेयर वितरित किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगों के सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए यह पहल की हैं।
सेक्टर-122 स्थित कम्युनिटी हॉल में आयोजित समारोह में प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रेरक वक्ता सागर सिन्हा, फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. महिपाल सिंह, फाउंडेशन की निदेशक एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, फाउंडेशन की सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी आदि मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने दिव्यांगों को करीब 40 उपकरण वितरित किए, जिनमें 10 इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, 10 सामान्य ट्राइसाइकिल और 20 व्हीलचेयर शामिल थीं।
कार्यक्रम का आकर्षण छात्रों द्वारा तैयार की गई स्किल डेवलपमेंट प्रदर्शनी रही, जिसमें हस्तशिल्प, रेजिन आर्ट और अन्य नवाचारों के माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य, कविता और नाटक की आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। एक सम्मान मां के नाम पहल के तहत माताओं के समर्पण और योगदान को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को ‘अवार्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। साथ ही ‘सेरेब्रल पाल्सी’ विषय पर प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण किया गया। बीएल वर्मा ने कहा कि डॉ. महिपाल सिंह की टीम केवल समाज सेवा ही नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। सरकारी नौकरियों में आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत तथा उच्च शिक्षा में 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द देकर इन बच्चों की क्षमता, सम्मान और आत्मविश्वास को नई पहचान दी थी। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति की प्रतिभा को सीमित नहीं कर सकतीं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य इसका प्रेरणादायक उदाहरण हैं। हमें दिव्यांगों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें शिक्षा, कौशल और समान अवसर उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे अपनी क्षमताओं के बल पर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
इस अवसर पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने फाउंडेशन के प्रतिभाशाली बच्चों द्वारा तैयार की गई वार्षिक पत्रिका ‘होराइजन’ का विमोचन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा विकसित सेंसरी इंटीग्रेशन इक्विपमेंट्स का बारीकी से अवलोकन करते हुए उनकी सराहना की और कहा कि इस प्रकार के नवाचार दिव्यांग बच्चों के मानसिक, शारीरिक और व्यवहारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




