Noida: नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता के हत्यारे दोषी करार, 24 साल करना पड़ा इंतजार
दोषी करार दिए गए तीनों लोगों को अदालत ने जेल भेज दिया है। जिन्हें सात जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।

लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में करीब 24 साल बाद लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने तीन आरोपी विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को हत्या और साजिश रचने का दोषी करार दिया है।
दोषी करार दिए गए तीनों लोगों को अदालत ने जेल भेज दिया है। जिन्हें सात जुलाई को सजा सुनाई जाएगी। आठ अगस्त 2002 को शाम करीब 4 बजे कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दौरान वह कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास से गुजर रहे थे। इस मामले में इंद्रदेव की पत्नी नयनतारा सिंह ने थाना कैसरबाग में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान सीबीआई ने मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने आए। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में जांच, साक्ष्य, गवाहों के बयान और न्यायिक प्रक्रिया के चलते मामला सालों तक अदालत में लंबित रहा। करीब 24 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में तीनों आरोपियों को दोषी माना।
इंद्रदेव सिंह नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता थे। इस सनसनीखेज वारदात ने उस समय प्रदेशभर में कानून-व्यवस्था और अधिक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हत्या के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन इसकी संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई।




