एआई समिट में रोबोटिक डॉग से इंटरनेशनल किरीकिरी, विश्वविद्यालय ने दी सफाई तो सपा ने आंदोलन की दी चेतावनी
छात्र संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। सपा छात्रसभा के जिलाध्यक्ष मोहित नागर ने कहा कि लाखों रुपये खर्च कर पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भ्रम पैदा करना अनुचित है।

दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीन की कंपनी के बयान गलगोटिया विश्वविद्यालय के पवेलियन को हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आने के बाद अंतरराष्ट्रय स्तर पर किरकिरी का आरोप लगा है। इसपर विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि रोबोट को इन-हाउस डेवलपमेंट के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया था। प्रोफेसर नेहा सिंह ने स्पष्ट किया कि यह डिवाइस छात्रों की ट्रेनिंग और रिसर्च उद्देश्यों के लिए खरीदी गई है तथा इसे शैक्षणिक प्रदर्शन के तौर पर प्रदर्शित किया गया था।
उधर, छात्र संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। सपा छात्रसभा के जिलाध्यक्ष मोहित नागर ने कहा कि लाखों रुपये खर्च कर पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भ्रम पैदा करना अनुचित है। उन्होंने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार गलगोटिया विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। विश्वविद्यालय पर ताला जड़ा जाएगा। दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई समिट के दौरान गलगोटिया विश्वविद्यालय की तरफ से रोबोटिक डॉग को ‘स्वदेशी इनोवेशन’ के रूप में पेश किया, वह दरअसल चीन निर्मित उत्पाद है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
दिल्ली में आयोजित India AI Summit के दौरान प्रदर्शित इस रोबोटिक डॉग को ‘ओरियन’ नाम दिया गया था। एक सरकारी न्यूज चैनल के इंटरव्यू में यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रतिनिधि इसके फीचर्स समझाते नजर आए। वीडियो में दावा किया गया कि इसे यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में तैयार किया गया है और यह 350 करोड़ रुपये के एआई इकोसिस्टम का हिस्सा है। हालांकि, टेक एक्सपर्ट्स ने जांच के बाद दावा किया कि यह रोबोट चीन की प्रसिद्ध कंपनी Unitree Robotics के ‘Unitree Go2’ मॉडल से मिलता-जुलता है। इस मॉडल की बाजार कीमत लगभग दो से ढाई लाख रुपये बताई जा रही है। यूनिट्री रोबोटिक्स किफायती और एडवांस सेंसर तकनीक वाले रोबोट बनाने के लिए जानी जाती है, जिनका उपयोग रिसर्च और इंडस्ट्रियल कार्यों में किया जाता है।
इसी बीच विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि समिट पवेलियन में मौजूद रिप्रेजेंटेटिव ने जो गलत जानकारी दी, उसके लिए हम माफी मांगते हैं। उन्हें उसके बारे में पता नहीं था। उन्होंने गलत जानकारी कैमरे पर आकर उन्हें दे दी। यहां तक की उन्हें बात करने का भी कोई अधिकार नहीं था। रोबोटिक डॉग के जरिए का मकसद बच्चों को डेवलप करना था। ‘डेवलप’ और ‘डेवलपमेंट’ दोनों में फर्क है। डेवलप शब्द का अर्थ छात्रों से है। जबकि “डेवलपमेंट” का अर्थ छात्र कुछ नया सीख और बना सकें। इसे इसलिए खरीदा गया ताकि बच्चे सीख सकें और समझ सकें। उन्हें यह जानकारी मिल सके कि विश्व में किस तरह की तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।




