Noida: GBU में करोड़ों के घोटाले के मामले में पूर्व रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी की न्यायालय ने खारिज की अग्रिम जमानत
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में पांच करोड़ के कथित घोटाले के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। जिला न्यायालय ने जीबीयू के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी और तत्कालीन वित्त अधिकारी नीरज कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस मामले में जीबीयू के रजिस्ट्रार ने इकोटेक-1 कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
अधिवक्ता दीपक भाटी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान आंतरिक ऑडिट और खातों के मिलान में भारी गड़बड़ी सामने आई। जांच में पाया गया कि छात्रों से वसूली गई फीस जो विश्वविद्यालय के सॉफ्टवेयर में दर्ज थी। वह बैंक खातों में जमा नहीं हुई। यह रकम 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। गठित कमिटी की ने पांच करोड़ से अधिक की गड़बड़ी की पुष्टि की थी। जिसके आधार पर पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. विश्वास त्रिपाठी, वित्त अधिकारी नीरज कुमार, कर्मचारी शैलेंद्र कुमार शर्मा, मुदित कुमार, विजय प्रताप सिंह, मुकेश पांडेय, शिव कुमार खत्री, शिवम चड्ढा, संदीप, श्याम, नवीन और सुभाष शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ आरोप अस्पष्ट हैं। यह भी कहा गया कि रजिस्ट्रार वित्त समिति का सदस्य नहीं होता और वित्तीय निर्णय अन्य अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।
फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने जांच के दौरान अकाउंट सेक्शन की सीसीटीवी फुटेज मांगी थी। आरोप है कि तीन बार लिखित अनुरोध के बावजूद फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि इससे साक्ष्य छिपाने या उनसे छेड़छाड़ की आशंका उत्पन्न होती है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। जिसकी अध्यक्षता सीबीआई मुख्यालय नई दिल्ली के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं आईजी एनएम सिंह ने की।



