जीएसटी कंसल्टेंट से 29 लाख रुपये की वसूली के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, बिसरख थाना प्रभारी और राइज सिटी चौकी प्रभारी लाइन हाजिर

ग्रेटर नोएडा वेस्ट – जीएसटी कंसल्टेंट को कथित रूप से बंधक बनाकर 29 लाख रुपये की वसूली किए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज करने में हुई लापरवाही पर गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ी कार्रवाई की है। आंतरिक जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद थाना बिसरख के प्रभारी निरीक्षक मुनेंद्र सिंह और राइज सिटी चौकी प्रभारी राहुल चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके अलावा एक कॉन्स्टेबल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार मामला 20 जुलाई 2026 का है। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी जीएसटी अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर एक जीएसटी कंसल्टेंट को रास्ते में रोक लिया। इसके बाद उसे कथित रूप से बंधक बनाकर जीएसटी से जुड़े मामले में जेल भेजने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोपियों ने उससे करीब 29 लाख रुपये की रकम वसूली।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से पूरी रकम बरामद कर ली गई है। इसमें करीब 24.50 लाख रुपये नकद और लगभग 4.50 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं।
फर्जी पुलिस वर्दी और सिविल डिफेंस की ड्रेस का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कथित वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने फर्जी पुलिस वर्दी और दिल्ली सिविल डिफेंस की वर्दी का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो कार, सात मोबाइल फोन और अन्य सामान भी बरामद किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कोई भी वास्तविक पुलिसकर्मी नहीं है।
शिकायत पर मुकदमा दर्ज करने में देरी बनी कार्रवाई का आधार
इस मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई भी सवालों के घेरे में रही। पीड़ित की ओर से शिकायत किए जाने के बावजूद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने के आरोप सामने आए थे। मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचने के बाद इसकी जांच कराई गई।
आंतरिक जांच में शिकायत पर समय से कार्रवाई नहीं करने और मुकदमा दर्ज करने में लापरवाही प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई। दोनों अधिकारियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि संबंधित कॉन्स्टेबल पर भी कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में स्पष्ट संदेश गया है कि गंभीर शिकायतों पर समय से कार्रवाई न करना अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भारी पड़ सकता है।




