भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में यूपी के तीन दिग्गजों की छुट्टी, राधा मोहन दास अग्रवाल, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और सुरेंद्र नागर को नहीं मिली जगह
नई दिल्ली – भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। संगठन में हुए इस बड़े फेरबदल में कई नए और अनुभवी चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं उत्तर प्रदेश से जुड़े तीन प्रमुख नेताओं डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और सुरेंद्र सिंह नागर को नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय पदाधिकारी के तौर पर जगह नहीं मिली है। इसे भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
खास बात यह है कि तीनों नेता उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण पहचान रखते हैं और राज्यसभा के सदस्य हैं। डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल जुलाई 2022 से उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य हैं। वहीं डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी राज्यसभा सदस्य हैं और संसद की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं। सुरेंद्र सिंह नागर भी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। संसद से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों में वाजपेयी और नागर दोनों की संसदीय समितियों में सदस्यता का उल्लेख मिलता है।
पिछली भाजपा राष्ट्रीय टीम में इन तीनों नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हुई थीं। राधा मोहन दास अग्रवाल राष्ट्रीय महामंत्री, लक्ष्मीकांत वाजपेयी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सुरेंद्र सिंह नागर राष्ट्रीय सचिव की भूमिका में थे। नई टीम में इन पदों पर बदलाव किया गया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश से आने वाले इन तीन वरिष्ठ नेताओं का राष्ट्रीय संगठन से बाहर होना भाजपा के नए संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को प्रतिनिधित्व देते हुए कई नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री, जबकि रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। इससे स्पष्ट है कि भाजपा ने राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व को बरकरार रखते हुए नेतृत्व के चेहरों में बदलाव किया है।
डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का राष्ट्रीय महामंत्री पद से बाहर होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पिछले कुछ वर्षों में भाजपा के केंद्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। इसी तरह लक्ष्मीकांत वाजपेयी उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन में उनका लंबा अनुभव है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखने वाले सुरेंद्र सिंह नागर भी पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में गिने जाते हैं।
हालांकि, राष्ट्रीय पदाधिकारी की सूची से बाहर होना भाजपा में इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका समाप्त होने का संकेत नहीं है। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को समय-समय पर अलग-अलग संगठनात्मक, संसदीय या राजनीतिक जिम्मेदारियां दी जाती रही हैं। इसलिए अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व इन तीनों वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों को भविष्य में कौन-सी नई जिम्मेदारी देता है।
कुल मिलाकर, नितिन नबीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के तीन अनुभवी और राज्यसभा सदस्य नेताओं को राष्ट्रीय पदाधिकारी की जिम्मेदारी न मिलना भाजपा के संगठनात्मक बदलाव का बड़ा संकेत है। नई टीम में नए चेहरों को मौका और पुराने चेहरों की जिम्मेदारियों में बदलाव—आने वाले राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से यह फैसला खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



