नोएडा की बिजली व्यवस्था पर आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय का सवाल, वर्टिकल सिस्टम से बढ़ी उपभोक्ताओं की परेशानी

नोएडा – हाईटेक शहर नोएडा में बिजली व्यवस्था को लेकर आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने आरोप लगाया कि जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर, सीमित संसाधनों और नई वर्टिकल व्यवस्था के कारण बिजली उपभोक्ताओं को लगातार मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नोएडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और कारोबारी शहर में आज भी बिजली व्यवस्था कई जगह पुरानी कार्यप्रणाली पर निर्भर है। वोल्टेज फ्लक्चुएशन, ट्रिपिंग और बार-बार बिजली बाधित होने की शिकायतें आम हैं। वहीं, केबल में खराबी आने पर पर्याप्त संसाधनों के अभाव में उसे बदलने में काफी समय लग जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ती है।
वर्टिकल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि बिजली विभाग की नई व्यवस्था ने उपभोक्ताओं की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर हल करने के बजाय उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर कर दिया है। बिजली बिल से संबंधित शिकायतों के लिए सेक्टर-18 स्थित बिजली घर, मीटर संबंधी मामलों के लिए सेक्टर-18 में पीएनबी बैंक के ऊपर स्थित कार्यालय और नए कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं के लिए सेक्टर-16 कार्यालय जाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में स्थित कार्यालयों तक पहुंचना खासकर बुजुर्ग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुश्किल है। पहले स्थानीय विद्युत उप-केंद्रों पर ही उपभोक्ताओं की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के कारण यह सुविधा प्रभावित हुई है।
मैनपावर और संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। आरडब्ल्यूए के मुताबिक, नोएडा में करीब 108 विद्युत उप-केंद्र हैं, जबकि उनकी जिम्मेदारी महज दो अधिशासी अभियंताओं पर है। ऐसे में यदि एक साथ कई स्थानों पर तकनीकी खराबी या केबल फॉल्ट हो जाए तो सीमित कर्मचारियों और संसाधनों के कारण बिजली बहाली में देरी होती है।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने नए बिजली कनेक्शन पर लगाए जा रहे ‘अफोर्डेबल चार्ज’ को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब उपभोक्ताओं को निर्बाध और आधुनिक बिजली व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो रही है, तब नए कनेक्शन के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने इस शुल्क को तत्काल समाप्त करने की मांग की।
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा प्रदेश के प्रमुख राजस्व देने वाले शहरों में शामिल है और यहां लाखों लोग रहते तथा कारोबार करते हैं। इसके बावजूद बिजली से जुड़ी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि बिजली बिल, मीटर सुधार और नए कनेक्शन से संबंधित समस्याओं का समाधान उपभोक्ताओं के नजदीकी विद्युत उप-केंद्रों पर ही कराने की व्यवस्था बहाल की जाए। साथ ही, नोएडा के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार होने वाली बिजली कटौती और विभागीय चक्कर से राहत मिल सके।




