Noida: MLC से जुड़े संस्थानों पर ED की कार्रवाई के बाद डॉ. नरेंद्र शर्मा की भूमिका पर भी उठे सवाल, कृषि विश्वविद्यालय से हुए चर्चित
डॉ. नरेन्द्र शर्मा पूर्व में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में कुलसचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं।

एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद अब मदरहुड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरेन्द्र शर्मा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों और विश्वविद्यालयी मामलों पर नजर रखने वाले लोगों के बीच यह सवाल उठाया जा रहा है कि जिन संस्थानों और व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों की जांच चल रही है, उनमें शीर्ष प्रशासनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल होनी चाहिए।
डॉ. नरेन्द्र शर्मा पूर्व में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में कुलसचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनके कार्यकाल को लेकर समय-समय पर विभिन्न प्रकार के विवाद और आरोप सार्वजनिक चर्चा का विषय बने रहे हैं। विरोधियों का दावा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन, नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई बार गंभीर प्रश्न खड़े हुए थे।
वर्तमान में डॉ. नरेन्द्र शर्मा मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की में कुलपति के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा मथुरा में प्रस्तावित गोधाम विश्वविद्यालय से जुड़ी समिति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। ऐसे में धर्मेन्द्र भारद्वाज से जुड़े संस्थानों पर हुई कार्रवाई के बाद उनकी प्रशासनिक भूमिका और पूर्व रिकॉर्ड को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कुलपति, कुलसचिव और अन्य शीर्ष पदों पर नियुक्त व्यक्तियों के शैक्षणिक, प्रशासनिक और कानूनी रिकॉर्ड की समय-समय पर स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के कार्यकाल को लेकर प्रश्न उठते हैं तो उन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होना सार्वजनिक हित में है।
उधर, ईडी की कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों की जांच केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनसे जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
फिलहाल डॉ. नरेन्द्र शर्मा अथवा संबंधित संस्थानों की ओर से इन चर्चाओं और आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। शिक्षा जगत की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां और संबंधित प्राधिकरण इस पूरे प्रकरण में आगे क्या कदम उठाते हैं।



