49 साल बाद भी नोएडा को शुद्ध पेयजल नहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुलेआम अनदेखी

नोएडा: नोएडा में शुद्ध पेयजल आपूर्ति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय नोएडा रेज़िडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (CONRWA) ने नोएडा विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि शहर की स्थापना के 49 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक नागरिकों को 100 प्रतिशत शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।
पत्र में कहा गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा लगभग 25 वर्ष पूर्व निर्देश दिए गए थे कि नोएडा में निर्धारित समयसीमा के भीतर उपयुक्त क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) स्थापित किए जाएं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। CONRWA का आरोप है कि संसाधनों और धन की कोई कमी न होने के बावजूद प्राधिकरण की उदासीनता के कारण यह जनहित का मुद्दा लगातार उपेक्षित रहा है।
संस्था के अनुसार, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नागरिकों का मौलिक अधिकार है। वर्तमान स्थिति में कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल और रैनीवेल से निकलने वाला टिंटेड (दूषित) पानी लोगों को मिल रहा है। इसके कारण घरों और संस्थानों में RO सिस्टम का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे 70 से 90 प्रतिशत पानी व्यर्थ बह जाता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गंगा जल में बिना पूर्ण उपचार के ट्यूबवेल या रैनीवेल का पानी मिलाने से गंगा जल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। संस्था का सुझाव है कि रिज़र्वायरों पर छोटे-छोटे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएं, ताकि गंगा जल और भूजल को पूरी तरह ट्रीट कर मिश्रित किया जा सके।
CONRWA ने सवाल उठाया है कि जब उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत नालों के पानी को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जा सकते हैं, तो पेयजल के लिए WTP क्यों नहीं लगाए जा सकते। संस्था का कहना है कि ऐसे प्लांट अत्यधिक महंगे भी नहीं हैं और इससे जल संरक्षण, गंगा जल का सदुपयोग तथा जल अपव्यय पर नियंत्रण संभव है।
संस्था ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्राधिकरण केवल जांच समितियां बनाकर औपचारिकता निभा रहा है, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
CONRWA ने नोएडा विकास प्राधिकरण से मांग की है कि इस विषय पर तत्काल ठोस नीति बनाकर उसे लागू किया जाए। साथ ही संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह इस जनहित के मुद्दे पर प्रशासन को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित इस गंभीर मुद्दे पर प्राधिकरण कब तक ठोस कदम उठाता है — क्योंकि पानी सिर्फ सुविधा नहीं, जीवन की बुनियाद है।




