युवराज केस की आंच के बीच सरकार का बड़ा फैसला, नोएडा को मिला नया सीईओ

नोएडा – उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण में बड़ा और निर्णायक प्रशासनिक कदम उठाते हुए 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्ण करुणेश को नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। लखनऊ से जारी आदेश के बाद यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अब तक अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACE0) के रूप में कार्यरत कृष्ण करुणेश को नोएडा की कमान सौंपे जाने को सरकार का सख्त और साफ संदेश माना जा रहा है।
यह फैसला ऐसे वक्त लिया गया है, जब सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में थी। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया और सरकार पर कड़ा एक्शन लेने का दबाव बढ़ा। ऐसे में नए सीईओ की तैनाती को महज़ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोरने वाला कदम माना जा रहा है।
कृष्ण करुणेश मूल रूप से बिहार के निवासी हैं और उन्हें एक सख्त, फील्ड में सक्रिय और जवाबदेही तय करने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने गाजियाबाद में एसडीएम और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के रूप में काम किया है, जबकि हापुड़ और बलरामपुर जैसे संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी (DM) रहते हुए उन्होंने कड़े और चर्चित फैसले लिए। जनवरी 2021 से वे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में उपाध्यक्ष के पद पर तैनात थे।
पूर्व सीईओ को हटाए जाने के बाद सरकार का रुख बिल्कुल साफ हो चुका था—अब पद नहीं, प्रदर्शन देखा जाएगा। कृष्ण करुणेश की नियुक्ति यह संकेत देती है कि निर्माण स्थलों की सुरक्षा, बिल्डरों की मनमानी, सड़क, ड्रेनेज और बेसमेंट से जुड़े खतरों के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही पर अब सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
हाईटेक सिटी नोएडा में लगातार सामने आ रही सुरक्षा चूक ने आम लोगों का भरोसा डगमगा दिया था। नए सीईओ से अब उम्मीद की जा रही है कि अवैध खुदाई और खुले गड्ढों पर त्वरित कार्रवाई होगी, निर्माणाधीन परियोजनाओं का सघन सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा और सिस्टम हादसों के बाद नहीं, बल्कि पहले हरकत में आएगा।
युवराज मेहता की मौत इस पूरे मामले में टर्निंग पॉइंट साबित हुई। निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में पानी से भरे गड्ढे में डूबने से हुई इस मौत के बाद यह खुलासा हुआ कि रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 90 मिनट की देरी हुई थी। सरकार द्वारा गठित SIT ने नोएडा अथॉरिटी, पुलिस और रेस्क्यू विभागों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है और कई जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है।
हजारों निर्माण परियोजनाएं, अरबों रुपये का निवेश और लाखों लोगों की सुरक्षा—नोएडा जैसे शहर को संभालना आसान नहीं है। लेकिन प्रशासनिक अनुभव, फील्ड पकड़ और सरकार के भरोसे के साथ कृष्ण करुणेश के सामने यह मौका भी है और चुनौती भी कि वे नोएडा प्रशासन की साख को दोबारा मजबूत करें।
अब पूरे शहर की नजर नए सीईओ के पहले फैसलों पर टिकी है। सवाल यही है—क्या बिल्डरों पर शिकंजा कसेगा, क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और क्या भविष्य में युवराज जैसे हादसों पर समय रहते लगाम लग पाएगी? नोएडा की जनता अब सिर्फ बयान नहीं, ज़मीन पर दिखने वाला एक्शन चाहती है।




