Noida: मरीज के खराब हुआ लिवर-किड़नी तो पत्नी और बेटी ने की रिश्तों की मिसाल पेश
मरीज के दाहिने गुर्दे में ट्यूमर होने के कारण करीब एक साल पहले राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी की गई थी।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित यथार्थ अस्पताल में एक 50 वर्षीय मरीज के सफल लिवर और किडनी प्रत्यारोपण किया गया है। उन्हें किडनी से संबंधित बीमारी आखिरी स्टेज पर थी। साथ ही हेपेटाइटिस बी संक्रमण होने के कारण वह क्रॉनिक लिवर डिजीज से भी पीड़ित थे। यहां तक की डोनर और मरीज के ब्लड ग्रुप अलग-अलग थे। इसके अलावा, डोनर का फैटी लिवर और मरीज में पहले से मौजूद कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी चुनौतियां भी थीं।
मरीज के दाहिने गुर्दे में ट्यूमर होने के कारण करीब एक साल पहले राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी की गई थी। इसके बाद वह क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित हो गए और नेफ्रेक्टॉमी के बाद से सप्ताह में तीन बार नियमित डायलिसिस करानी पड़ रही थी। साथ ही मरीज को टाइप-2 डायबिटीज के साथ डायबिटिक नेफ्रोपैथी और न्यूरोपैथी, हाई ब्लड प्रेशर और सिंगल-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज भी थी।
यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने लिवर एवं किडनी की स्थिति को भांपते हुए दोनों अंगों का ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया। मरीज की पत्नी ने अपने पति को लिवर दिया तो बेटी ने अपनी किडनी देने का फैसला लिया। लिवर प्रत्यारोपण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि B पॉजिटिव डोनर के लिवर को जीरो पॉजिटिव मरीज में प्रत्यारोपित करना था और दोनों के ब्लड ग्रुप अलग थे। वहीं, किडनी डोनर और मरीज का ब्लड ग्रुप समान था।
पूरी सर्जरी में करीब 15–16 घंटे लगे। इसमें लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, एनेस्थीसिया, ब्लड बैंक और क्रिटिकल केयर टीमों ने मिलकर काम किया। प्रत्यारोपण के बाद मरीज ने अच्छी रिकवरी के संकेत दिखाए और लिवर तथा किडनी दोनों ग्राफ्ट ने अच्छी तरह काम करना शुरू किया। यथार्थ अस्पताल के डॉक्टर विशाल कुमार चौरसिया ने बताया कि एक साथ लिवर और किडनी प्रत्यारोपण सबसे जटिल प्रकार की ट्रांसप्लांट सर्जरी में से एक है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज और डोनर दोनों ही स्वास्थ्य है।



