ग्रैंडथुम बिल्डर की टीम को दुकानदार ने लौटाया वापस, एक करोड़ की दुकान का इंटीरियर रुकवाने पर सुमित सोम ने जताया कड़ा विरोध

ग्रेटर नोएडा वेस्ट – ग्रैंडथुम कमर्शियल प्रोजेक्ट में दुकान के इंटीरियर कार्य को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रैंडथुम ओनर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी के सदस्य सुमित सोम का आरोप है कि करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान कर अपनी दुकान का इंटीरियर करा रहे थे, तभी बिल्डर की ओर से सिक्योरिटी विभाग से विनय और फिटिंग मैनेजर मोहन मौके पर पहुंचे और इंटीरियर का काम रुकवाने का प्रयास किया।
सुमित सोम के अनुसार, मौके पर काम रुकवाने के लिए तीन माह की एडवांस मेंटेनेंस जमा नहीं किए जाने तथा वर्क परमिट नहीं होने का हवाला दिया गया। सुमित सोम ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मेंटेनेंस शुल्क को लेकर एसोसिएशन और बिल्डर के बीच पहले से विवाद चल रहा है और यह मामला संबंधित प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में इस विवाद का हवाला देकर उनकी दुकान का इंटीरियर कार्य रोकना उचित नहीं है।
सुमित सोम ने मौके पर पहुंचकर विनय और मोहन के सामने अपना पक्ष रखा तथा काम रुकवाने के प्रयास का विरोध किया। उनके विरोध के बाद मौके से आए लोगों के वापस लौटने की बात कही गई है।
वीडियो कॉल पर कोर कमेटी को दी जानकारी
घटना के बाद सुमित सोम ने ग्रैंडथुम ओनर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को वीडियो कॉल के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कोर कमेटी के ज्येष्ठ उपाध्यक्ष श्री हिमांशु गर्ग तथा अन्य सदस्य श्री हिमांशु सोलंकी को घटनाक्रम से अवगत कराया।
सुमित सोम ने कहा कि यदि उनकी दुकान में चल रहे इंटीरियर कार्य को दोबारा जबरन रुकवाने का प्रयास किया गया तो एसोसिएशन के माध्यम से इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर धरना देने की चेतावनी भी दी।
सुमित सोम बोले—मेंटेनेंस विवाद का समाधान पहले हो
सुमित सोम का कहना है कि उन्होंने दुकान के लिए करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान किया है और अब व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक इंटीरियर कार्य करा रहे हैं। उनका कहना है कि जब मेंटेनेंस को लेकर विवाद प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है, तब उसी विवाद को आधार बनाकर निजी दुकान में इंटीरियर का काम रोकने का प्रयास खरीदारों पर दबाव बनाने जैसा है।
उन्होंने कहा कि खरीदार और बिल्डर के बीच किसी भी विवाद का समाधान बातचीत अथवा सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से होना चाहिए।
पूर्व डीजीपी अनिल प्रथम ने भी कानून के दायरे में कार्रवाई की बात कही
मामले पर गुजरात के पूर्व डीजीपी श्री अनिल प्रथम ने कहा कि कब्जा दिए जाने के बाद किसी खरीदार के परिसर में किए जा रहे कार्य को लेकर यदि कोई विवाद है तो उसका समाधान कानून के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेकर जबरन काम रोकने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का काम जबरन रुकवाया जाता है या उसके साथ दबाव अथवा धमकी जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो वह संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत कर सकता है और कानून के अनुसार एफआईआर सहित उचित कार्रवाई की मांग कर सकता है।




