भारत के युवाओं में बढ़ रहा ‘साइलेंट किलर’, 30 की उम्र से पहले हाई ब्लड प्रेशर बना नई हेल्थ चुनौती

नोएडा – यथार्थ Super Speciality Hospital के विशेषज्ञों ने युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कभी 50 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली बीमारी माने जाने वाला हाई ब्लड प्रेशर अब 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी तेजी से देखा जा रहा है।
डॉक्टरों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार बदलती जीवनशैली, लगातार बढ़ता तनाव, देर रात तक जागना, बढ़ता स्क्रीन टाइम, प्रोसेस्ड फूड और शारीरिक गतिविधियों में कमी इस समस्या के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के मुताबिक भारत में 24 प्रतिशत पुरुष और 21.3 प्रतिशत महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 1.4 अरब लोग हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहे हैं।
हाल ही में प्रकाशित ICMR से जुड़े अध्ययनों में भारत में हाई ब्लड प्रेशर की व्यापकता 35.5 प्रतिशत तक बताई गई है, यानी हर तीन में से एक भारतीय इस बीमारी की चपेट में है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को यह तक पता नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक है।
Dr. कृष्णा यादव ने बताया कि पिछले 5 से 10 वर्षों में युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। अस्पताल की कार्डियोलॉजी ओपीडी में आने वाले लगभग 30 प्रतिशत मरीज हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित पाए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या 30–45 वर्ष आयु वर्ग की है।
उन्होंने कहा, “हाइपरटेंशन को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में अक्सर इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी फेलियर या हार्ट फेलियर जैसी गंभीर जटिलताएं सामने आती हैं।”
विशेषज्ञों के अनुसार वर्क फ्रॉम होम संस्कृति, नाइट शिफ्ट, रोजाना 8–10 घंटे स्क्रीन टाइम, फास्ट फूड और सोशल मीडिया से जुड़ा मानसिक दबाव युवाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले नए ट्रेंड बन चुके हैं।
एक अन्य राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 28 प्रतिशत वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं, लेकिन हर तीन में से दो मरीजों को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं होती।
Dr. अनिल कुमार कुमाऊँनी ने कहा कि यदि युवा समय रहते अपनी जीवनशैली में बदलाव नहीं करते, तो आने वाले वर्षों में भारत में हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बीपी जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम, 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद, नमक का सीमित सेवन, तनाव प्रबंधन और स्क्रीन टाइम में कमी इस साइलेंट किलर से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।



